रिटायर्ड प्रोफेसर को 12 साल से नहीं मिली पेंशन, मानवाधिकार आयोग ने दिया अल्टीमेटम
<p style="text-align: justify;">किसी कर्मचारी के लिए रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन और दूसरे लाभ उसकी आर्थिक सुरक्षा का बड़ा सहारा होते हैं, लेकिन तेलंगाना में एक रिटायर्ड प्रोफेसर को इन्हीं लाभों के लिए करीब 12 साल तक इंतजार करना पड़ा. मामला इतना लंबा खिंचा कि आखिरकार तेलंगाना मानवाधिकार आयोग को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा. आयोग ने अब हैदराबाद के NIMS को बकाया पेंशन संबंधी लाभ जल्द जारी करने का निर्देश दिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह मामला निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS), हैदराबाद के पूर्व प्रोफेसर डॉ. मंथा श्रीनिवास से जुड़ा है. वह एनेस्थीसियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर रहे हैं, उन्होंने 13 नवंबर 2014 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS लिया था. इसके बाद उन्होंने अपने पेंशन संबंधी कागजात भी जमा किए, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों का भुगतान लंबे समय तक अटका रहा. डॉ. श्रीनिवास ने इस देरी के खिलाफ तेलंगाना मानवाधिकार आयोग का रुख किया. आयोग ने 5 अक्टूबर 2026 को मामले पर अपना आदेश जारी किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>2023 में आदेश के बाद भी नहीं मिली रकम</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मामले में एक अहम बात यह रही कि तेलंगाना सरकार अक्टूबर 2023 में ही NIMS को प्रोफेसर के पेंशनरी लाभ जारी करने का निर्देश दे चुकी थी, इसके बावजूद भुगतान नहीं हो सका. इस दौरान मामले को लेकर अलग-अलग समितियों और प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा, जिससे देरी और बढ़ती चली गई.</p>
<p style="text-align: justify;">आयोग ने इतने लंबे समय तक भुगतान लंबित रहने और मामले को संभालने के तरीके पर नाराजगी जताई. आयोग के मुताबिक, पेंशन कर्मचारी की वर्षों की सेवा से जुड़ा अधिकार है और रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा तथा सम्मानजनक जीवन के लिए इसका महत्व है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>NIMS डायरेक्टर को खुद देखना होगा मामला</strong></p>
<p style="text-align: justify;">तेलंगाना मानवाधिकार आयोग ने NIMS के डायरेक्टर को निर्देश दिया है कि वह व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करें. डॉ. श्रीनिवास को मिलने वाले सभी पेंशनरी लाभों का निर्धारण कर उनका भुगतान तीन हफ्ते के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा NIMS को आयोग के सामने अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करनी होगी. मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आदेश नहीं माना तो होगी कार्रवाई</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर निर्देश का पालन नहीं हुआ, तो NIMS डायरेक्टर को खुद आयोग के सामने उपस्थित होकर देरी की वजह बतानी पड़ सकती है. हालांकि, तीन सप्ताह की समयसीमा इसी मामले के लिए दी गई है. इसे सभी पेंशन मामलों पर लागू होने वाला सामान्य नियम नहीं माना जा सकता. यह मामला दिखाता है कि रिटायरमेंट लाभों में देरी किसी बुजुर्ग कर्मचारी के लिए कितनी बड़ी परेशानी बन सकती है. ऐसे मामलों में पेंशन से जुड़े आवेदन, रसीद, विभागीय पत्राचार और सरकारी आदेशों जैसे दस्तावेजों को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी देखें-</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/07PdA7rG00k?si=FUlVFQUnhQgfIyRU" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
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