जरूरत की खबर- दशहरे के मेले में लाउडस्पीकर से सावधान:तेज आवाज से हार्ट-ब्रेन को नुकसान, हियरिंग लॉस का रिस्क, 7 सावधानियां जरूरी

Oct 14, 2026 - 04:43
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जरूरत की खबर- दशहरे के मेले में लाउडस्पीकर से सावधान:तेज आवाज से हार्ट-ब्रेन को नुकसान, हियरिंग लॉस का रिस्क, 7 सावधानियां जरूरी
देश में नवरात्रि का पर्व उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह पंडाल सजे हैं, गरबा हो रहे हैं और माता के भजनों से माहौल भक्तिमय है। कई जगह मेलों की भी रौनक है। इन आयोजनों में एक चीज कॉमन है, वह है लाउडस्पीकर, जिनकी आवाज उत्सव के माहौल को और जीवंत बना देती है। हालांकि, लाउडस्पीकर की आवाज जरूरत से ज्यादा तेज हो या लंबे समय तक उसके संपर्क में रहें तो सेहत पर बुरा असर पड़ता है। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन में भी बदलाव होते हैं। तेज शोर से हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है। कई मामलों में मौत भी हो जाती है। साल 2025 में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक मेटा-एनालिसिस के मुताबिक, लाउडस्पीकर की तेज आवाज से हाई BP, हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। ऐसे में लाउडस्पीकर से जुड़ी सावधानियों को समझना जरूरी है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में लाउडस्पीकर की तेज आवाज के संभावित हेल्थ रिस्क को समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट– डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली स्टोरी में आगे बढ़ें, उससे पहले पिछले कुछ सालों में लाउडस्पीकर की तेज आवाज से हुई मौतों के मामलों पर एक नजर डाल लेते हैं… सवाल- लाउडस्पीकर की तेज आवाज हमारे ब्रेन और बॉडी पर क्या असर डालती है? जवाब- इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आवाज कितनी तेज है और हम कितनी देर तक उसके संपर्क में रहते हैं। सामान्य बातचीत की आवाज करीब 60 डेसिबल (dB) होती है, जबकि तेज लाउडस्पीकर की आवाज 85 से 110 डेसिबल या इससे ज्यादा होती है। डेसिबल आवाज की तीव्रता मापने की इकाई है। लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से कानों के साथ हमारे कई अंग प्रभावित होते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए- सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- तेज आवाज का हमारे हार्ट पर क्या असर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- तेज आवाज का कानों पर क्या असर होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स समझिए- सवाल- लाउडस्पीकर की तेज आवाज किन लोगों के लिए ज्यादा रिस्की है? जवाब- कुछ लोगों में तेज शोर का असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। किन्हें रिस्क ज्यादा है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कितने डेसीबल (dB) की आवाज को तेज या खतरनाक माना जाता है? जवाब- इसका खतरा सिर्फ डेसीबल पर नहीं, बल्कि कितनी देर और कितनी बार उसके संपर्क में रहते हैं, इस पर निर्भर करता है। आमतौर पर 85 dB या उससे ज्यादा आवाज में लंबे समय तक रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। 100–120 dB की तेज आवाज में थोड़ी देर रहने से भी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- लाउडस्पीकर से होने वाले शोर से कैसे बचें? जवाब- तेज आवाज से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि साउंड से दूरी और एक्सपोजर टाइम दोनों कम रखें। सभी सावधानियां ग्राफिक में देखिए- सवाल- भारत में लाउडस्पीकर साउंड को लेकर क्या नियम हैं? जवाब- भारत में लाउडस्पीकर और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए नॉइज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 लागू हैं। इनके तहत- सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए शोर की अधिकतम सीमा तय की है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- तय सीमा से ज्यादा शोर होने पर कहां और कैसे शिकायत करें? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? जवाब- तय सीमा से ज्यादा शोर करने या बिना अनुमति लाउडस्पीकर चलाने पर पुलिस/प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। स्थिति के अनुसार- ****************** ग्राफिक्स- महेंद्र वर्मा ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- व्रत का ‘पसंदीदा फलाहार’ साबूदाना कितना हेल्दी: डॉक्टर से जानें न्यूट्रिशन, फायदे-नुकसान और खाने का हेल्दी तरीका आज से नवरात्रि शुरू हो रही है। कई लोग 9 दिनों का व्रत रखते हैं। इस दौरान रसोई में एक चीज की एंट्री लगभग तय होती है, वह है साबूदाना। व्रत रखने वाले लोग कभी खिचड़ी, कभी वड़ा तो कभी खीर के रूप में इसे बड़े चाव से खाते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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