बेटी-बहू को घर से निकाल सकते हैं बुजुर्ग माता-पिता या नहीं? हाई कोर्ट ने बताया

Oct 02, 2026 - 00:58
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बेटी-बहू को घर से निकाल सकते हैं बुजुर्ग माता-पिता या नहीं? हाई कोर्ट ने बताया
<p style="text-align: justify;">बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति से जुड़ा एक अहम फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया है. आदेश कुछ इस अनुसार है कि वे बुजुर्ग माता-पिता अपनी संपत्ति से बच्चों या अन्य कानूनी वारिसों को बाहर करने के लिए संबंधित अधिकारी से गुहार लगा सकते हैं.</p> <p style="text-align: justify;">यह व्यवस्था अहम तौर पर उन मामलों में लागू होती है, जहां बुजुर्गों को देखभाल की कमी या फिर किसी भी तरह का गलत व्यवहार का सामना करना पड़ रहा हो.&nbsp;<br /><br /><strong>कोर्ट ने साल 2009 के नियमों को माना सही&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय जी और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिल्ली में लागू मेंटेनेंस एंड वेलफेर ऑफ पेरेंटस एंड सीनीयर सिटिजन रूल्स, 2009 के नियम 22(3)(1) की वैधता को बरकरार रखा.</p> <p style="text-align: justify;">कोर्ट का कहना था कि प्रावधान वरिष्ठ नागरिकों को उनकी संपत्ति और सम्मानजनक जीवन की सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाया गया है. वह व्यवस्था मेंटेनेंस एंड वेलफेर ऑफ पेरेंटस एंड सीनीयर सिटिजन एक्ट , 2007 के तहत बनाए गए कानूनी प्रावधानों पर आधारित है.&nbsp;</p> <p style="text-align: justify;"><strong>किस मामले में आया फैसला&nbsp;</strong></p> <p style="text-align: justify;">बताया जा रहा है कि यह मामला पूनम नाम कि एक महिला से जुड़ा था, जिन्होंने अपनी सास की ओर से जारी बेदखली के आदेश को दिल्ली के हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. असल मामले यह है कि पूनम कि शादी एक वरिष्ठ नागरिक महिला से हुई थी और उन दोनों के बच्चे भी हैं.</p> <p style="text-align: justify;">लेकिन कुछ समय के बाद पारिवारिक विवाद के चलते उन्होंने घरेलू हिंसा कानून के तहत ससुराल की संपत्ति में रहने के अधिकार की मांग की थी, जिसके बाद उनकी सास ने उन्हें संपत्ति से बाहर कर देने का आवेदन दिया.&nbsp;<br /><br />शुरुवात में बताया गया कि जिला मजिस्ट्रेट ने बताये गये आवेदन को खारिज कर दिया था. हालांकि, बाद में दिल्ली के डिविजनल कमिश्रर ने अपील स्वीकार करते हुए पूनम को घर खाली करने का आदेश दिया, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा दिया गया था.&nbsp;<br /><br /><strong>कोर्ट ने क्या कहा?</strong></p> <p style="text-align: justify;">हाई कोर्ट ने माना कि किसी महिला का साझा घर में रहने का दावा हर स्थिति में सर्वोच्च नहीं हो सकता है. मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि पूनम नौकरी करती थीं और उनके पास अलग घर भी था.</p> <p style="text-align: justify;">कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को भी अपनी संपत्ति में शांतिपूर्वक रहने का अधिकार है. इसलिए दोनों पक्षों के अधिकारों को मामले की परिस्थितियों के अनुसार देखा जाना जरूरी है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>नियम 22 में क्या है प्रावधान?</strong></p> <p style="text-align: justify;">दिल्ली के नियम 22 के तहत वरिष्ठ नागरिक अपनी सुरक्षा और संपत्ति से जुड़ी शिकायतों के लिए जिला प्रशासन की मदद ले सकते हैं. बाद में 2016 में नियम में बदलाव करके बच्चों या अन्य कानूनी वारिसों को वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से बाहर करने की प्रक्रिया जोड़ी गई. इसके बाद 2017 में भी इसमें संशोधन किया गया.</p> <p style="text-align: justify;">इसके तहत कोई वरिष्ठ नागरिक या माता-पिता अपने बेटे, बेटी या कानूनी वारिस के खिलाफ उपयुक्त या जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन कर सकते हैं. यह कदम तब उठाया जा सकता है जब उन्हें देखभाल नहीं मिल रही हो या उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा हो.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>संपत्ति की जांच के बाद जारी होता है नोटिस</strong></p> <p style="text-align: justify;">आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी संपत्ति के मालिकाना हक और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए इसे सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के पास भेज सकता है. नियमों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद संबंधित लोगों को लिखित नोटिस दिया जाता है. इसमें उनसे पूछा जाता है कि उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों नहीं जारी किया जाना चाहिए.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>कोर्ट ने याचिका खारिज की</strong></p> <p style="text-align: justify;">दिल्ली हाई कोर्ट ने पूनम की याचिका को खारिज करते हुए डिविजनल कमिश्नर के बेदखली आदेश को बरकरार रखा. अदालत ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और संपत्ति से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए इन नियमों को केवल इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता कि मूल कानून में बेदखली की प्रक्रिया अलग से विस्तार से नहीं लिखी गई है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी पढ़ें- </strong><strong><a href="https://www.abplive.com/utility-news/uidai-aadhaar-new-services-face-authentication-for-ration-token-system-swik-portal-and-website-3195939">UIDAI ने आधार की 5 सर्विस को बनाया आसान, राशन के लिए अब चेहरा ही पहचान</a></strong></p> <p style="text-align: justify;"><strong>यह भी देखें-</strong></p> <p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/6N4BdYpRUxQ?si=_s-L5KPV2GxccI3q" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>

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