साबरमती से चलेगी देश की पहली LNG ट्रेन, हर साल होगी करीब 12 लाख रुपये की बचत

Sep 28, 2026 - 20:35
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साबरमती से चलेगी देश की पहली LNG ट्रेन, हर साल होगी करीब 12 लाख रुपये की बचत
<p style="text-align: justify;">भारतीय रेलवे की ओर से वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन की दिशा में कल एक महत्वपूर्ण दिन साबित होने जा रहा है क्योंकि कल ही केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री <a title="अमित शाह" href="https://www.abplive.com/topic/amit-shah" data-type="interlinkingkeywords">अमित शाह</a> गुजरात के साबरमती स्टेशन से देश की पहली LNG (Liquefied Natural Gas) संचालित डुअल-फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. इस तकनीक का मकसद रेलवे की डीजल पर निर्भरता कम करना, ईंधन खर्च घटाना और प्रदूषण को कम करना है.</p> <p style="text-align: justify;">अहमदाबाद रेलवे मंडल के मुताबिक, भारतीय रेलवे पहली बार ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में LNG आधारित फ्यूल सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. इस तकनीक में इंजन LNG और डीजल दोनों से चल सकता है. ईंधन की उपलब्धता के आधार पर इंजन दोनों में से किसी एक ईंधन का इस्तेमाल कर सकेगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ट्रायल हो चुका है पूरा</strong></p> <p style="text-align: justify;">इस परियोजना के तहत दो ड्राइविंग पावर कारों को LNG-डीजल डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला गया है. और हर एक DPC की क्षमता 1,400 हॉर्सपावर है. रेलवे के मुताबिक, दोनों कन्वर्टेड DPC पर अब तक 2,000 किलोमीटर से ज्यादा का फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है. ट्रायल के दौरान नई तकनीक की क्षमता और विश्वसनीयता की भी जांच की गई है. रेलवे के अनुसार, यह सिस्टम डीजल की जगह करीब 40 फीसदी तक LNG का इस्तेमाल कर सकता है.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>60 फीसदी डीजल का होग इस्तेमाल</strong></p> <p style="text-align: justify;">आपको बता दें कि यह ट्रेन पूरी तरह LNG पर निर्भर नहीं होगी. डुअल-फ्यूल सिस्टम की वजह से इंजन जरूरत के मुताबिक LNG और डीजल दोनों पर चल सकेगा. LNG उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ट्रेन को डीजल से भी चलाया जा सकेगा. इससे संचालन में ईंधन की उपलब्धता से जुड़ी परेशानी भी कम होने की उम्मीद है. रेलवे के मुताबिक, LNG के इस्तेमाल से ट्रेन को ईंधन भरवाने से पहले ज्यादा दूरी तय करने में भी मदद मिल सकती है.</p> <p style="text-align: justify;">रेलवे का कहना है कि LNG के इस्तेमाल से डीजल की खपत और इंजन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी. इससे कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) जैसे प्रदूषक तत्वों को कम करने में मदद मिलेगी.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>रेलवे की होगी बचत</strong></p> <p style="text-align: justify;">जरूरी बात ये भी है कि LNG की लागत डीजल की तुलना में कम होने की वजह से रेलवे को फ्यूल खर्च में भी बचत की उम्मीद है. ट्रायल के आंकड़ों के आधार पर रेलवे का अनुमान है कि एक DPC से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये की बचत हो सकती है. वहीं, 8 कोच की एक रेक के लिए सालाना अनुमानित बचत करीब 23.9 लाख रुपये बताई गई है.</p> <p style="text-align: justify;">एक DPC में करीब 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है. इसमें लगभग 950 से 1,000 किलोग्राम उपयोग योग्य LNG भरी जा सकती है. और रेलवे के स्वीकृत डिजाइन के मुताबिक, एक DPC का पूरी तरह भरा LNG टैंक रोजाना करीब 444 किलोमीटर तक संचालन के लिए पर्याप्त फ्यूल उपलब्ध करा सकता है. इससे बार-बार फ्यूल भरने की जरूरत कम हो सकती है.</p> <p style="text-align: justify;">रेलवे के मुताबिक, LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि पारंपरिक डीजल इंजन की पावर, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता बनी रहे. यानी फ्यूल की बचत और उत्सर्जन में कमी के साथ ट्रेन के प्रदर्शन से समझौता नहीं किया जाएगा.</p> <p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.abplive.com/utility-news/know-why-airport-car-parking-charges-getting-expensive-day-by-day-in-india-3194208">कार पार्क करते ही जेब ढीली, एयरपोर्ट पर गाड़ी खड़ी करना इतना महंगा क्यों?</a></strong></p>

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