कोर्ट ने विधवा को दिलाया 1 करोड़ का क्लेम, पति की सड़क हादसे में हुई थी मौत
<p style="text-align: justify;">बीमा पॅालिसी लेने के बावजूद भी कभी-कभी ऐसा मुश्किल वक्त सामने आ जाता है, जब परिवार को क्लेम की रकम की जरूरत पड़ जाती है. ऐसा ही एक मामला आंध्र प्रदेश से सामने आया है, जहां एक पत्नी ने अपने पति के मौत के बाद बीमा कंपनी से अपनी रकम की मांग की तो कंपनी ने मांग स्वीकार करने के बजाय एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया. इसके बाद यह मामले उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा जहां आयोग ने महिला के पक्ष में अपना फैसला सुनाया. </p>
<p style="text-align: justify;">क्या है पूरा मामल?</p>
<p style="text-align: justify;">बताया जाता है कि यह मामला एक पत्थर फैक्टरी चलाने वाले व्यक्ति से जुड़ा है. जहां उस व्यक्ति ने 13 मार्च साल 2024 में पूरे एक करोड़ रुपये की बीमा पॅालिसी खरीदी थी, जो कि 11 मार्च साल 2027 तक वैध थी. पॅालिसी के आधार पर कोई दुर्घटना के चलते नामित व्यक्ति को बीमा राशि मिलने का प्रावधान था. 28 जुलाई 2025 की रात में करीब 8:45 बजे वह व्यक्ति मिनी ट्रक से सफर कर रहे थे, उसी दौरान सड़क हादसे में वह गंभीर रुप से घायल हो गए. </p>
<p style="text-align: justify;">दुर्घटना के तुरंत बाद उन्हें पास के सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, जहां डॅाक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. इसके कुछ समय बाद मृत व्यक्ति कि पत्नी जो कि पॅालिसी के आधार पर नॅामनी थीं, उन्होंने बीमा कंपनी से क्लेम मांगा. </p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>बीमा कंपनी ने क्यों रोका एक करोड़ का क्लेम?</strong><br /><br />बीमा कंपनी ने विधवा को क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया. कंपनी का कहना है कि पॅालिसी लेते समय मृत व्यक्ति ने अपनी आय को बढ़ा कर बताया था. उनका यह भी दावा था कि मृतक के बेटे ने भी आय बढ़ाकर बताई थी. </p>
<p style="text-align: justify;">महिला ने जवाबी तौर पर सभी आरोपों को गलत बताया, उनका कहना था कि उनके पति के पास स्टोन पॉलिशिंग फैक्ट्री,लॉरियां और कृषि भूमि भी थी. इसलिए प्रीमियम भरने के लिए उनके पास पर्याप्त आर्थिक साधन थे.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मामले की सुनवाई करते हुए उपभोक्ता आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी की जांच रिपोर्ट अपने आप में धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत जानकारी देने का पुख्ता सबूत नहीं है. आयोग ने बेटे के बयान को भी ऐसा स्पष्ट प्रमाण नहीं माना, जिससे यह साबित हो सके कि पॉलिसी धारक ने जानबूझकर अपनी आय बढ़ाकर बताई थी.</p>
<p style="text-align: justify;">आयोग ने यह भी ध्यान दिया कि कंपनी ने प्रस्ताव स्वीकार किया, पॉलिसी जारी की और प्रीमियम लिया था. ऐसे में सिर्फ साबित न हुए आय संबंधी आरोप के आधार पर क्लेम खारिज करना ठीक नहीं माना जायेगा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>पत्नी को मिलेंगे 1 करोड़ रुपये</strong></p>
<p style="text-align: justify;">आयोग ने बीमा कंपनी को महिला को पॉलिसी की 1 करोड़ रुपये की राशि देने का निर्देश दिया. इसके अलावा मानसिक परेशानी के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये देने को भी कहा गया. कुल भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का आदेश दिया गया है.</p>
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<p style="text-align: justify;"><strong>यह भी देखें- </strong></p>
<p style="text-align: justify;"><iframe title="YouTube video player" src="https://www.youtube.com/embed/hYK_XZfM0Hk?si=iCVK4SuzPkUpva-e" width="560" height="315" frameborder="0" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
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