बेटे ने मांगा जायदाद में हिस्सा, कोर्ट ने कहा- बीवी के साथ खाली करो घर
<p style="text-align: justify;">मां- बाप की प्रॉपर्टी पर बच्चों का अधिकार होता है, ये तो हम सभी को पता है. लेकिन जब माता- पिता में से कोई एक जिंदा हो और उसकी बच्चों से ना बनती हो, तब? क्या तब भी बच्चे का सम्पत्ति से हिस्सा मांगना सही होगा? इस सवाल का जवाब हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया है, जिसमें बताया गया है कि आखिर इस प्रॉपर्टी का हकदार कौन होगा.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मां के मकान पर बेटे की ओर से किए गए मालिकाना हक के दावे को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने बेटे और उसकी पत्नी को मकान खाली करने और उनके लगाए ताले हटाने का आदेश दिया है. ये मामला दिल्ली के करावल नगर इलाके का है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या है पूरा मामला?</strong><br />ये मामला करीब 30 साल पुराना है. साल 1996 में महिला के पति ने अपनी कमाई से एक मकान खरीदा था, लेकिन संपत्ति महिला के नाम पर थी. इसके लिए GPA, एग्रीमेंट टू सेल, वसीयत और रसीद जैसे दस्तावेज मौजूद थे. शादी के बाद महिला ने अपने बेटे और बहू को भी इसी मकान में रहने की अनुमति दी थी. समय के साथ मां और बेटे के रिश्ते खराब हो गए. इसके बाद मां ने दोनों से घर खाली करने को कहा. लेकिन बेटे ने मकान में अपना हिस्सा होने का दावा किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>क्या कहा बेटे ने?</strong><br />बेटे का कहना था कि जब जमीन खरीदी गई थी, तब उसने 1.5 लाख रुपये दिए थे. इसके अलावा मकान बनवाने में भी उसने 60 हजार रुपये खर्च किए थे. उसका दावा था कि इन पैसों के योगदान के कारण उसे मकान का संयुक्त मालिक माना जाना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">हालांकि, बेटा कोर्ट में ये साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दे सका कि उसने जमीन खरीदने या मकान बनाने के लिए ये रकम वास्तव में दी थी. वो अपने नाम पर संपत्ति का कोई स्वतंत्र मालिकाना दस्तावेज भी पेश नहीं कर पाया.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>कोर्ट ने सुनाया फैसला</strong><br />दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल घर के खर्च, निर्माण या मरम्मत में पैसे लगाने से किसी व्यक्ति को संपत्ति का मालिकाना हक नहीं मिल जाता. कोर्ट ने ये भी माना कि मकान पर मां के पास मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे. कोर्ट ने ये भी साफ किया कि अगर पति अपनी कमाई से पत्नी के नाम पर संपत्ति खरीदता है, तो केवल इस वजह से वो संपत्ति अपने आप बेनामी नहीं हो जाती. इस मामले में पति ने संपत्ति के लिए पैसा दिया था, लेकिन मकान पत्नी के नाम पर था. इससे बेटे को संपत्ति में कोई अधिकार नहीं मिल जाता.</p>
<p style="text-align: justify;">आखिर में कोर्ट ने मां के हक में फैसल सुनाते हुए बेटे और बहू को घर खाली करने का फैसला सुनाया.</p>
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