श्रीकृष्ण की सीख:गलत काम देखकर चुप रहना भी कई बार गलत काम का समर्थन बन जाता है, सही निर्णय लेने में देर न करें

Sep 10, 2026 - 12:29
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श्रीकृष्ण की सीख:गलत काम देखकर चुप रहना भी कई बार गलत काम का समर्थन बन जाता है, सही निर्णय लेने में देर न करें
महाभारत युद्ध अपने अंतिम चरण में था। एक ओर अर्जुन और दूसरी ओर कर्ण थे। दोनों एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे थे। युद्ध के बीच अचानक कर्ण के रथ का पहिया जमीन में धंस गया। कर्ण रथ से नीचे उतरे और पहिया निकालने की कोशिश करने लगे। दूसरी ओर अर्जुन ने अपने धनुष पर बाण चढ़ा रखा था। कर्ण ने अर्जुन से कहा, “तुम एक निहत्थे योद्धा पर वार मत करो। मुझे अपना रथ का पहिया निकाल लेने दो। इसके बाद मैं फिर से तुम्हारे साथ युद्ध करूंगा। एक योद्धा को युद्ध के नियमों का पालन करना चाहिए।” तभी श्रीकृष्ण ने कर्ण को उसकी पुरानी बातें याद दिलाईं। उन्होंने कहा कि जब द्रौपदी का अपमान हुआ, तब धर्म की बात क्यों नहीं की गई? जब जुए में छल हुआ, तब धर्म कहां था? वनवास पूरा करने के बाद पांडवों को उनका अधिकार नहीं दिया गया, तब धर्म की याद क्यों नहीं आई? अभिमन्यु को भी अनेक योद्धाओं ने मिलकर घेरा और मार दिया। तब युद्ध के नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया? श्रीकृष्ण ने कर्ण से कहा कि जब मनुष्य स्वयं गलत कामों का साथ देता है, तब केवल अपनी मुसीबत के समय धर्म की दुहाई देना उचित नहीं है। श्रीकृष्ण की बातें सुनकर कर्ण निराश हो गए। इसके बाद श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम अपने कर्तव्य से पीछे मत हटो, बाण चलाओ। अर्जुन ने बाण चलाया और कर्ण की मृत्यु हो गई। कर्ण महान दानवीर थे, साहसी थे और एक कुशल योद्धा थे। फिर भी उन्होंने कई बार दुर्योधन के गलत कार्यों का साथ दिया। उनकी अच्छाइयां थीं, लेकिन गलत पक्ष का साथ देने का परिणाम भी भुगतना पड़ा। यह प्रसंग हमें सीख देता है कि केवल अच्छा इंसान होना पर्याप्त नहीं है। हमें सही समय पर सही पक्ष का साथ भी देना चाहिए। अगर हम गलत काम होते देखकर चुप रहते हैं या अपने स्वार्थ के लिए गलत लोगों का साथ देते हैं, तो एक दिन उन्हीं फैसलों का असर हमारे जीवन पर पड़ सकता है। इसलिए जीवन में हमेशा न्याय, सच्चाई और सही काम का साथ देना चाहिए। प्रसंग की सीख

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