पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि आज:10 अक्टूबर तक पितरों के लिए करें श्राद्ध-तर्पण, ऐसा करने से उतरता है पितृ ऋण; ये हैं सुख-समृद्धि से जुड़ी मान्यताएं
आज (27 अक्टूबर) पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज उन मृत लोगों का श्राद्ध किया जाएगा, जिनकी मृत्यु किसी महीने की प्रतिपदा तिथि पर हुई थी। पितृ पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध, धूप-ध्यान, पिंडदान, तर्पण, दान-पुण्य जैसे धर्म-कर्म करने की परंपरा है। इस साल 10 अक्टूबर तक पितृ पक्ष रहेगा। घर-परिवार के मृत सदस्यों को पितर देवता माना जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितरों को याद करते हुए धूप-ध्यान करने से पितरों की कृपा मिलती है और घर-परिवार की नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। पितृ पक्ष में श्राद्ध और धूप-ध्यान क्यों करना चाहिए? उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, शास्त्रों में इंसानों के लिए तीन ऋण बताए गए हैं- देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण। मान्यता- पितृ पक्ष में पितर देव आते हैं अपने कुटुंब के लोगों के घर मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितृ लोक से अपने कुटुंब के लोगों के घर आते हैं। इस दौरान हमारे द्वारा किए गए श्राद्ध और धूप-ध्यान से तृप्त होकर वे अपने धाम पितृ लोक लौट जाते हैं। जो लोग पितरों के लिए ये धर्म-कर्म नहीं करते हैं, उनके पितर देव अतृप्त रहते हैं और दुखी होकर पितृ लोक लौटते हैं। माना जाता है कि जिन लोगों के पितृ अतृप्त होते हैं, उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अब जानिए कौन किसके लिए श्राद्ध कर्म कर सकता है?
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