मुकेश खन्ना बोले- जन गण मन हटाओ वंदे मातरम लाओ:राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में फर्क भूले, पंजाब सिंध को कहा पंजाब सिंग, 2 और गड़बड़ की

Aug 19, 2026 - 18:49
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मुकेश खन्ना बोले- जन गण मन हटाओ वंदे मातरम लाओ:राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान में फर्क भूले, पंजाब सिंध को कहा पंजाब सिंग, 2 और गड़बड़ की
शक्तिमान एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में राष्ट्रगान जन गण मन को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि इसकी जगह वंदे मातरम को देनी चाहिए। हालांकि ये बयान देते हुए उनसे बड़ी गड़बड़ हो गई। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाना चाहिए, जबकि ये पहले से ही राष्ट्रगीत है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रगान जन गण मन हाते हुए भी गड़बड़ कर दी। हाल ही में आईएएनएस को दिए बयान में मुकेश खन्ना ने कहा, ‘मैं तीन साल पहले बोल चुका हूं कि वंदे मातरम को राष्ट्रगीत बनाओ (ये राष्ट्रगीत ही है)। ये जन मन गण (जन गण मन) हमारे देश का नहीं है। ये जो क्वीन एलिजाबेथ थीं, उनके मान में रवींद्रनाथ टेगौर ने एक स्तुति गान लिखा था, उसको हमने मान लिया, भाग्य विधाता, पंजाब सिंग (सिंध)। अरे ये हमारा नहीं है। हमारा है वंदे मातरम, लता जी (मंगेशकर) ने गाया है।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी ये जन मण गण (जन गण मन) को हटाओ और वंदे मातरम को लाओ। मोदी जी ने शुरुआत कर दी है। हर स्कूल में ये अनिवार्य हो चुका है कि पहले वंदे मातरम गाया जाएगा। वो भी 3-4 अंतरे नहीं पूरे 7 अंतरे। मुझे खुशी है कि वंदे मातरम उठ रहा है। मेरा गाना भी बन रहा है, मैं उसे 6 महीने में रिलीज कर दूंगा।’ केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है। मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है। सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है। 28 जनवरी को पहली बार आदेश आया इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसमें मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा। वंदे मातरम् के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना होगा। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3.10 मिनिट है। पहले दो अंतरे गाए जाते थे। सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा। अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को उस दौरान खड़ा होना जरूरी नहीं होगा। बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था। 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं। वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

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