मान्यताएं:घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से पितृ पक्ष में कौन-कौन से काम करना चाहिए

Oct 03, 2026 - 07:09
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मान्यताएं:घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से पितृ पक्ष में कौन-कौन से काम करना चाहिए
अभी पितृ पक्ष चल रहा है और पितर के लिए धूप-ध्यान करने का यह उत्सव 10 अक्टूबर तक है। पितृ पक्ष में धूप-ध्यान, तर्पण, पिंडदान, दान और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा है। मान्यता है कि इन पितृ पक्ष में किए गए धर्म-कर्म से पितर देवता तृप्त होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहने का आशीर्वाद देते हैं। जानिए पितृ पक्ष में कौन-कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं... उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक पितृ पक्ष में जल में काले तिल मिलाकर पितरों के नाम से तर्पण करना प्रमुख कर्म माना गया है। सामान्य रूप से दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है। तर्पण करते समय अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण किया जा सकता है। जिस पूर्वज की मृत्यु जिस तिथि पर हुई हो, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा है। अगर पितृ पक्ष में कुछ मृत लोगों का श्राद्ध करना भूल गए हैं, तो सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या (10 अक्टूबर) पर उनका श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। श्राद्ध पक्ष में जरूरतमंद लोगों भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि देवकार्य और पितृकार्य करते समय जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना चाहिए। भोजन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा भी देनी चाहिए। पितृ पक्ष में अन्न, वस्त्र, तिल, जलपात्र और अपनी क्षमता के अनुसार धन का दान करना शुभ माना जाता है। दान दिखावे के लिए नहीं, श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में गाय, कुत्ते, कौवे और अन्य जीवों को भोजन का अंश देने का विधान है। इन जीवों को भोजन कराने से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसी मान्यता है। पितृ पक्ष में घर का वातावरण शांत बनाए रखना चाहिए। गुस्सा, झगड़े और अपशब्दों से बचना बचना चाहिए। अपना व्यवहार संयमित रखें। पितृ पक्ष में भगवान के नामों का स्मरण करें, मंत्र-जप करें, गीता, गरुड़ पुराण, रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करें। इसका उद्देश्य मन को शांत रखना और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है। अब जानिए धूप-ध्यान करने के लिए जरूरी चीजें और धूप-ध्यान करने की विधि… जरूरी चीजें- गाय के गोबर से बने कंडे, धूप देने के लिए हवन कुंड या अन्य कोई बर्तन, घी, काले तिल, चावल, गुड़, कर्पूर, जल से भरा तांबे का लोटा, फूल, बैठने के लिए आसन। अगर ये सभी चीजें उपलब्ध न हो, तो जल, तिल, कंडे के अंगारे और गुड़-घी से भी श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करके धूप-ध्यान किया जा सकता है। आप चाहें तो खीर-पुड़ी भी बना सकते हैं। खीर-पुड़ी से भी धूप दिया जाता है।

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