जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?:डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक

Aug 19, 2026 - 18:54
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जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?:डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक
कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में एक ही बात आती है, यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल हमारी कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन D के निर्माण के लिए जरूरी है। परेशानी तब शुरू होती है, जब शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाता है और खासतौर पर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर चुपचाप बढ़ता रहता है। न कोई दर्द होता है, न कोई खास लक्षण दिखाई देता है। कई बार पहली चेतावनी हार्ट अटैक या स्ट्रोक के रूप में सामने आती है। ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) की हालिया स्टडी के मुताबिक, देश के 87.3% वयस्कों में लिपिड प्रोफाइल की कोई-न-कोई गड़बड़ी पाई गई। इनमें करीब 35.5 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें न डायबिटीज है, न हाई ब्लड प्रेशर और न ही मोटापा। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कोलेस्ट्रॉल क्या है और इसके बढ़ने का मतलब क्या है। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में कोलेस्ट्रॉल पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अमित सिंह, कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई सवाल- कोलेस्ट्रॉल क्या है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल एक फैटी सब्सटेंस है, जो मोम की तरह होता है। यह शरीर की हर सेल में पाया जाता है। यह हार्मोन, विटामिन D और बाइल एसिड (भोजन पचाने वाला एसिड) प्रोडक्शन के लिए जरूरी होता है। सवाल- गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल में क्या फर्क है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल फैट है। यह ब्लड में अकेले नहीं घूम सकता। इसलिए प्रोटीन के साथ मिलकर 'लिपोप्रोटीन' बनाता है। इसी रूप में यह पूरे शरीर में पहुंचता है। लिपोप्रोटीन मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं- 1. LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) 2. HDL (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) ग्राफिक में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का फर्क देखिए- सवाल- शरीर में कोलेस्ट्रॉल आता कहां से है? जवाब- इसके दो मुख्य सोर्स हैं- सवाल- क्या कोलेस्ट्रॉल शरीर का दुश्मन है? जवाब- नहीं, सच इसके उलट है। दिक्कत कोलेस्ट्रॉल से नहीं, बल्कि इसके संतुलन बिगड़ने से होती है। जब ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो यह आर्टरीज में जमा होने लगता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- कोलेस्ट्रॉल शरीर में कौन-से जरूरी काम करता है? जवाब- संतुलित मात्रा में कोलेस्ट्रॉल शरीर के कई जरूरी कामों में मदद करता है। ग्राफिक में इसके सभी काम देखिए- सवाल- कोलेस्ट्रॉल कैसे चेक करते हैं? जवाब- इसका पता लगाने के लिए 'लिपिड प्रोफाइल' ब्लड टेस्ट किया जाता है। टेस्ट में ब्लड के 4 मुख्य कंपोनेंट्स मापे जाते हैं- सवाल- लिपिड प्रोफाइल का सामान्य रेंज क्या है? जवाब- कॉडियोलॉजिस्ट डॉ. अमित सिंह के मुताबिक, वयस्कों में लिपिड प्रोफाइल की सामान्य रेंज आमतौर पर इस तरह है- टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL (मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर) से कम। LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): 100 mg/dL से कम। HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल): 40-80 (पुरुष), 50-80 (महिलाएं) ट्राइग्लिसराइड्स: 150 mg/dL से कम। सवाल- कोलेस्ट्रॉल कब खतरा बन जाता है? जवाब- जब ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल लंबे समय तक सामान्य से ज्यादा रहता है, तो यह सेहत के लिए खतरा बन जाता है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते। लेकिन धीरे-धीरे आर्टरीज को नुकसान पहुंचता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- हमारी कौन-सी आदतें हाई कोलेस्ट्रॉल का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- रोजमर्रा की कई खराब आदतें बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती हैं। जैसेकि- सवाल- कौन-से फूड बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं? जवाब- सैचुरेटेड और ट्रांस फैट वाले फूड्स ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है? जवाब- हां, हेल्दी फैट और फाइबर से भरपूर चीजें खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसकी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन मिथ और उनकी सच्चाई क्या है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। इनकी वजह से कई बार लोग समय पर जांच नहीं कराते या लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव नहीं करते। कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन मिथ और उनकी सच्चाई देखिए- सवाल- अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए तो क्या करें? जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें और उन्हें लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट दिखाएं। साथ ही खानपान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें। अगर इन बदलावों से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल न हो तो डॉक्टर ‘स्टैटिन’ जैसी दवाएं दे सकते हैं। ये दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए। सवाल- स्टैटिन ड्रग क्या होता है? जवाब- ये ऐसी दवाएं हैं, जो लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं। इससे ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल घटाने और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम करने में मदद मिलती है। इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। सवाल- क्या बिना स्टैटिन के भी कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो सकता है? जवाब- हां, कुछ लोगों में हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है। सवाल- इसके लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गले में हमेशा कुछ फंसा-फंसा लगता है: हो सकती है हिडन एसिडिटी, लक्षण नहीं दिखते, पर इलाज जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर कभी-कभी गले में खराश होना या खंखारकर गला साफ करना सामान्य है। लेकिन अगर बिना सर्दी-खांसी के भी बार-बार गला साफ करने का मन करे, गले में कुछ फंसा-फंसा महसूस हो या आवाज बार-बार बैठ जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी वजह ‘हिडन एसिडिटी’ हो सकती है। पूरी खबर पढ़िए…

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