गणेश चतुर्थी पूजन विधि और मनाने का सरल तरीक़ा

गणेश चतुर्थी भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। इस दिन घर में बप्पा की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस मार्गदर्शिका में गणेश जी की स्थापना, आवश्यक पूजन सामग्री, दूर्वा व मोदक अर्पण, आरती और विसर्जन की सरल व सटीक विधि बताई गई है, जिससे आप घर पर ही गणेश चतुर्थी को भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मना सकें।

Sep 09, 2026 - 18:31
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गणेश चतुर्थी पूजन विधि और मनाने का सरल तरीक़ा

गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान श्री गणेश के जन्मोत्सव के रूप में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। घर में गणपति बाप्पा को लाने और उनकी स्थापना व पूजन की सरल विधि इस प्रकार है:

1. पूर्व तैयारी एवं सामग्री

  • साफ-सफाई: घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। प्रवेश द्वार पर तोरण (आम/अशोक के पत्तों का) लगाएं।

  • सामग्री: मिट्टी की गणेश प्रतिमा, लकड़ी की चौकी, लाल/पीला कपड़ा, गंगाजल, कलश, आम के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत, दूर्वा (दूब घास), जनेऊ, मोदक, लड्डू, फूल और धूप-दीप।

2. गणपति स्थापना विधि

  • दिशानिर्देश: पूजा स्थान के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा सबसे शुभ मानी जाती है।

  • चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर थोड़े अक्षत (चावल) रखें।

  • बप्पा की प्रतिमा को विराजमान करें। ध्यान रखें कि उनका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो।

  • प्रतिमा के दाईं ओर जल से भरा कलश रखें, जिसमें आम के पत्ते और नारियल स्थापित करें।

3. पूजन प्रक्रिया

  • संकल्प व आह्वान: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर पूजा का संकल्प लें और 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करते हुए बप्पा का आह्वान करें।

  • श्रृंगार व तिलक: प्रतिमा पर गंगाजल का छिड़काव करें। उन्हें जनेऊ पहनाएं, रोली-चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।

  • विशेष अर्पण: गणेश जी को दूर्वा घास अत्यंत प्रिय है, उन्हें कम से कम 11 या 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें। लाल या पीले फूल चढ़ाएं।

  • भोग: बप्पा के मनपसंद मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। साथ में फल और तांबूल (पान-सुपारी) भी अर्पित करें।

4. आरती और पाठ

  • धूप और घी का दीपक प्रज्वलित करें।

  • गणेश चालीसा या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

  • अंत में पूरे परिवार के साथ 'जय गणेश, जय गणेश देवा' की आरती गाएं और सभी में प्रसाद वितरित करें।

5. विसर्जन

आप अपनी श्रद्धानुसार 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 11वें दिन (अनंत चतुर्दशी) पर पूरे आदर और मंत्रों के साथ बप्पा को विदाई देकर जल में विसर्जित कर सकते हैं।

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